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Wednesday, September 30, 2015

भाषा संरचना के स्‍तर

हैलि‍डे  (Sapir : Language pp 56-58)  ने भाषा के तीन प्रमुख स्‍तर माना है-
वस्‍तु  (Substance)
रूप (form)
परि‍स्‍थि‍ति‍ (situation)

इन स्‍तरों के अनुरूप भाषा की तीन आधारभूत अभि‍रचनाऍं हैं-
ध्‍वनि‍ की अभि‍रचना   pattern of Sound 
रूप की अभि‍रचना Pattern of Form
अर्थ की अभि‍रचना  pattern of Meaning

1)  ध्‍वन्‍यात्‍मक पक्ष
दुनि‍या की सभी भाषाओं में द्वैत-व्‍यवस्‍था(DUAL SYSTEM) होती है। ग्‍लीसन ने इस द्वैत व्‍यवस्‍था के उपादानों को 'अभि‍व्‍यक्‍ति‍' और 'कथ्‍य' का नाम दि‍या है। 
(Gleason : An Introduction to descriptive linguistics pp-2-3)

हॉकेट ने भाषा को आदतों की जटि‍ल व्‍यवस्‍था कहा है। उन्‍होंने भाषा की इस व्यवस्‍था को 5 उपव्‍यवस्‍थाओं में वि‍भाजि‍त कि‍या है-
केंद्रीय उपव्‍यवस्‍था के अंतर्गत व्‍याकरणि‍क,  स्‍वनि‍मि‍क और रूपस्‍वनि‍मि‍क उपव्‍यवस्‍था।
परीधीय उपव्‍यवस्‍था के अंतर्गत आर्थी और स्‍वनि‍क उपव्‍यवस्‍था। येल्‍मस्‍लेव ने भाषा अध्‍ययन के लि‍ए परीधीय उपव्‍यस्‍था का अध्‍ययन करनेवाली शाखा अर्थ वि‍ज्ञान और ध्‍वनि‍वि‍ज्ञान को अप्रासंगि‍क बताया है। 

अर्थ वि‍ज्ञान और जे आर फर्थ (1890- 1960) (JR Firth : The Technique of semantics p-19)
 अर्थ वि‍षयक अध्‍ययन में लंदन स्‍कूल का वि‍शेष योगदान रहा है। जे.आर.फर्थ भाषा को एक अर्थपूर्ण प्रक्रि‍या मानते हैं। वे अर्थ को वि‍भि‍न्‍न स्‍थि‍ति‍यों के संदर्भ में अध्‍ययन करने पर बल देते हैं। वे केंद्रीय उपव्‍यवस्‍था को अर्थ से जोड़कर देखते हैं। फर्थ भाषा के प्रत्‍येक स्‍तर को भाषा का प्रकार्य मानते हैं। 


Bloomfield  : Language
Hockett : A course in Modern Linguistics p -137

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