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Sunday, July 26, 2009

फोर्ट वि‍लि‍यम कॉलेज और गद्य लेखन

लार्ड वेलज़ली ने सन् 1800 में कलकत्ता में फोर्ट वि‍लि‍यम कॉलेज की स्थापना की थी।
फोर्ट वि‍लि‍यम कॉलेज कॉम्‍प्‍लैक्‍स(1828) की दुर्लभ तस्‍वीर


कहा ये जाता है कि‍ इस कॉलेज ने पहले-पहल हि‍न्दी खड़ी बोली में गद्य-रचना उपलब्ध करवाई मगर सच तो ये है कि‍ इससे पहले दो प्रमुख रचनाऍं लि‍खी जा चुकी थी-

मुंशी सदासुखलाल ‘नि‍याज़’ - ज्ञानोपदेशवाली पुस्तक,
इंशाअल्ला खॉं - ‘रानी केतकी की कहानी’
आपको ध्यान होगा कि‍ 1800 ईस्वी से पहले हि‍न्दी और उर्दू - दोनों में पद्य साहि‍त्य ही लि‍खा जाता था। गद्य की आवश्यकता को देखते हुए 1803 ईस्वी में जान गि‍लक्राइस्ट ने कॉलेज के आश्रय में हि‍न्दी और उर्दू– दोनों में पुस्तक तैयार कराने की व्यवस्था। की। इस क्रम में दो पुस्तके आईं-
लल्लूलाल जी - प्रेमसागर
सदल मि‍श्र - नासि‍केतोपाख्यान

इन प्रारंभि‍क प्रयत्नों के बावजूद हि‍न्दी गद्य की अखण्ड‍ परंपरा सन् 1857 के बाद ही चल पाती है। इस बीच ईसाई धर्म प्रचारक अपने मत को साधारण जनता के बीच फैलाने के लि‍ए ईसाई धर्म पुस्तकों का अनुवाद हि‍न्दी में कर रहे थे। आचार्य शुक्ल इस बात को जोर देकर कहते हैं कि‍ उर्दू की जगह हि‍न्दी को अनुवाद के लि‍ए ठीक समझना दर्शाता है कि‍ खड़ी बोली हि‍न्दी‍ ही जनसाधारण की भाषा थी। ( उर्दू-हि‍न्दी वि‍वाद की चर्चा कि‍सी और पोस्ट में की जाएगी।)

(उक्‍त फोटो गुगल से साभार)

1 comment:

अनिल कान्त : said...

हिंदी की पहली कहानी मानने के बारे में भी तमाम दिलचस्प विवाद हैं

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति