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Monday, September 22, 2008

कवि‍ता में छंद और तुक के वि‍धान का प्रश्‍न

छायावाद तक आते-आते हि‍न्‍दी में पद्य- लेखन के लि‍ए उर्दू, संस्‍कृत और हि‍न्‍दी- इन तीन स्‍थलों से छंद-रूप ग्रहण कि‍या गया। यह बात हैरान करती है कि‍ आचार्य शुक्‍ल उर्दू के लेखन शैली को वि‍चार के लायक तक नहीं समझते, क्‍योंकि‍ उनकी नजर में यह नैराश्‍य और आलस्‍य पर अवलंबि‍त था। संस्‍कृत के वर्णवृत्‍तों में समास की जकड़बंदी भी खड़ी बोली के काव्‍य को कोई स्‍वच्‍छंद दि‍शा नहीं दे सकती थी। ऐसे में सारा दारोमदार हि‍न्‍दी के अपने छंद दंडक और सवैया पर आ गया, साथ ही इसमें नये छंदों के प्रयोग का भी स्‍वागत कि‍या गया। खड़ी बोली को मॉंजने में दो कवि‍यों का महत्‍वपूर्ण योगदान रहा-
-मैथि‍लीशरण गुप्‍त, जिन्‍होंने गीति‍का और नए गढ़े हुए छंदो का प्रयोग कि‍या।
-गोपालशरण सिंह, जि‍न्‍होंने सवैया को खड़ी बोली में एक नई पहचान दी।

महावीर प्रसाद द्वि‍वेदी पहले ही कह चुके थे कि‍-
‘’तुले हुए शब्‍दों में कवि‍ता करने और तुक, अनुप्रास आदि‍ ढूँढ़ने से कवि‍यों के विचार स्‍वातंत्र्य में बाधा आती है।‘’

नये छंदों के व्‍यवहार से शुक्‍ल जी को भी कोई गुरेज नहीं, और वे तुक को भी अनि‍वार्य वस्‍तु नहीं मानते, बशर्ते उसमें बुद्धि‍तत्‍व का अभाव न हो। मुक्‍त छंद को वे सीधे-सीधे पश्‍चि‍म की नकल मानते हैं। अमेरि‍का के एक कवि‍ वाल्‍ट ह्वि‍टमैन ( Walt Whitman) की रचना लीव्‍स ऑफ ग्रास (1855) इसी मुक्‍त छ़ंद में मि‍लती है, और पहले पहल यह बँगला साहि‍त्‍य में अवतरि‍त हुआ, और वहॉं से होते हुए हि‍न्‍दी के प्रख्‍यात रचनाकार नि‍राला में ये शैली नजर आती है।

(शुक्ल जी की पुस्‍तक से साभार)

आपकी जानकारी के लि‍ए बता दूँ कि‍-

आलोचक रामचन्‍द्र शुक्ल ने अध्‍ययन की सुविधा के लि‍ए आधुनि‍क काल के काव्‍य-खण्‍ड को पहले दो धाराओं में वि‍भाजि‍त कि‍या:
-पुरानी धारा, जि‍समें ब्रजभाषा की कवि‍ता समानांतर रूप से लि‍खी जा रही थी।
-नई धाराऍं, जि‍समें खड़ी बोली के काव्‍य को क्रमश: तीन उत्‍थानों में समेटा गया है।

पहले उत्‍थान में भारतेंदु हरि‍श्‍चंद्र मंडल के कवि‍यों की चर्चा है। द्वि‍तीय उत्थान में द्वि‍वेदी मंडल के कवि‍ आते हैं और तृतीय उत्‍थान में शुक्‍ल जी की अपनी समकालीन काव्‍यधारा, जि‍समें छायावाद भी शामि‍ल है, उसकी गूढ़ चर्चा मि‍लती है। क्रम से यह प्रकरण 4 में आता है।

1 comment:

Udan Tashtari said...

बहुत ज्ञानवर्धक जानकारी.