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Thursday, September 18, 2008

हि‍न्‍दी साहि‍त्‍य का आधुनि‍क काल : 1857 से अब तक

हि‍न्‍दी साहि‍त्‍य के आधुनि‍क काल की रूपरेखा : सन् 1857 का यह काल वि‍भाजन आचार्य रामचन्‍द्र शुक्‍ल की कि‍ताब पर आधारि‍त है, और सामग्री भी वहीं से ली गई है।





शुक्‍ल जी आधुनि‍क काल की चर्चा 'गद्य खंड' से आरंभ करते हैं और इसे उन्‍होंने दो प्रकरणों में बॉटा है:-

प्रकरण 1 में गद्य के वि‍कास के अंतर्गत ब्रज भाषा और खड़ी बोली के गद्य का परि‍चय दि‍या गया है।

प्रकरण 2 में आधुनि‍क काल में गद्य साहि‍त्‍य का आवि‍र्भाव कि‍स रूप में हुआ, इसका बढ़ि‍या वि‍श्‍लेषण मि‍लता है।



एक ब्रेक के बाद चर्चा होगी प्रकरण 1 के बारे में.......

3 comments:

Udan Tashtari said...

हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.

वर्ड वेरिपिकेशन हटा लें तो टिप्पणी करने में सुविधा होगी. बस एक निवेदन है.

डेश बोर्ड से सेटिंग में जायें फिर सेटिंग से कमेंट में और सबसे नीचे- शो वर्ड वेरीफिकेशन में ’नहीं’ चुन लें, बस!!!

राजीव रंजन प्रसाद said...

आपका हार्दिक अभिनंदन। पोस्ट की हैडिंग देख कर ही आत्मा प्रसन्न हो गयी। अंतर्जाल पर इस विषय में सामग्री उपलब्ध कराना एक यज्ञ किये जाने जैसा है। आपको कोटिश: धन्यवाद। आपकी हर पोस्ट की प्रतीक्षा रहेगी।


***राजीव रंजन प्रसाद
www.sahityashilpi.com
www.rajeevnhpc.blogspot.com
www.kuhukakona.blogspot.com

शोभा said...

साहित्य पर पढ़कर अछ्छा लगा। भविष्य में कुछ और पढ़ने की आशा है।